नीलगिरी

नीलगिरी

करीब चार सौ किस्म के युकलिप्टुस के प्रजाति पायीं जाती हैं। एक प्रजाति युकलिप्टुस ग्लोबल्स, जिसे ब्लू गम के नाम से जाना जाता है। विश्व भर में, ‘नीलगिरी/ Eucalyptus’ तेल का मुख स्रोत है। ये तेल पत्तों और तनो से डिस्टिलेशन प्रक्रिया के माध्यम से निकाला जाता है। ये तेल एक रंगहीन, खास खुशबू वाला तरल होता है, जिसमें कुछ खास रसायन होते हैं जैसे उकलीप्टल, फ्लैवोनॉइड और टैनिन। इसका पेड़ काफी लंबा और पतला होता है। इसकी पत्तियां लंबी और नुकीली होती हैं जिनकी सतह पर गांठ होती है और इन्हीं में से तेल का रिसाव होता है।

लाल चंदन

लाल चंदन

भारत में फल, फूल, सब्जी, अनाज और लकड़ियों की ऐसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिन्हें उगाना तो आसान है, लेकिन इनकी कीमत करोड़ों में होती है। ऐसी ही एक प्रजाति है लाल चंदन की। जी हां,….अभी तक सिर्फ सफेद चंदन के बारे में सुना था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाल चंदन को दुनिया की सबसे दुर्लभ पर सबसे महत्वपूर्ण लकड़ी माना जाता है। इसका इस्तेमाल संगीत के वाद्य यंत्र बनाने, फर्नीचर और मूर्तियां बनाने के अलावा और औषधियां बनाने के लिये किया जाता है। लाल चंदन की मांग तो दुनियाभर में होती है, लेकिन इसका सबसे अच्छा उत्पादन सिर्फ भारत में ही होता है।

रॉक सॉल्ट

रॉक सॉल्ट

सेंधा नमक सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। सेंधा नमक में मिनरल्स, आयरन, जिंक मैग्नीशियम और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. सेंधा नमक को डाइट में शामिल कर शरीर को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकते हैं।

Rock Salt को पिंक साल्ट, हिमालयन साल्ट, रॉक साल्ट, लाहौरी नमक या हैलाइड सोडियम क्लोराइड का नाम से जाना जाता है। सभी पहाड़ी नमक का ही रूप है। Rock Salt में मिनरल्स, आयरन, जिंक मैग्नीशियम और पोषक तत्व पाए जाते हैं जो सेहत के लिए काफी लाभदायक माने जाते हैं। Rock Salt को डाइट में शामिल कर शरीर को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकते हैं। सेंधा नमक के सेवन से स्किन को हेल्दी रखा जा सकता है।

चीड़ का पेड़

चीड़ का पेड़

चीड़ को सेहत के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार से करके आप खुद को काफी लाभ पंहुचा सकते हैं। इस पेड़ से एक खास प्रकार का गोंद निकलता है जिसका इस्तेमाल तेल से लेकर अन्य कई प्रकार के उत्पादों को बनाने में किया जा सकता है। ठंडी जगहों पर आपको चीड़ का पेड़ ज्यादा देखने को मिल सकता है।

सिट्रोनेला ऑयल

सिट्रोनेला ऑयल

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लाखों लोगों की मौत सिर्फ मच्छर के काटने से होती है, जिनसमें से सबसे अधिक खतरनाक मच्छर हैं ‘ Anopheles, Aedes और Culex मच्छर हैं। ऐसे में मच्छरों से बचाव के लिए बजारों में तरह-तरह के मच्छर भगाने के उपाय भी मौजूद हैं जैसे कॉयल, स्प्रे, लोशन आदि जो शरीर के लिए खतरनाक होते हैं। ऐसे में जरूरत है प्राकृतिक और सेफ उपाय की जो और वो है सिट्रोनेला ऑयल / Citronella Oil.

लोबान

विज्ञान द्वारा समर्थित प्राचीन प्रथाओं को संरक्षित करने का इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता। हानिकारक airborne/ वतानीत रोगाणुओं/ कीटाणुओं से लड़ने के लिए धूप (ट्री गम / रेजिन और जड़ी-बूटियों का उपयोग करने की एक तकनीक) का उपयोग किया जाता है । लोबान अपने जीवाणुरोधी गुणों के कारण धूप के लिए आधार के रूप में उपयोग किए जाने वाले कई स्वादों या रेजिन में से एक है। दुनिया भर में गम बेंजोइन के रूप में जाना जाता है, यह दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकांश हिस्सों में पाया जाता है। इत्र उद्योग में, इसका उपयोग रासायनिक पदार्थ के रूप में होता है, जिसकी मदद से परफ्यूम बेस आयल के ज़रिए वातावरण में सुगंध को फैलाया जाता है।

गुग्गल

गुग्गल एक उष्ण कटिबंधीय पौधा है। गुग्गुल की तासीर गर्म होती है, यह स्वाद में कड़वा होता है। गुग्गुल का वानस्पतिक नाम Commiphora wightii (कौमीफोरा वाइटिआइ) है। इसे गूगल और गुग्गुलु के नाम से भी जाना जाता है। इसे अंग्रेजी में Indian bdellium कहते हैं। गुग्गुल गोंद (guggul meaning in hindi) को औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गुग्गुल विटामिंस, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स से भरपूर होता है। सामान्यतः 6 से 8 वर्ष पुरानी झाड़ियां, गोंद निकालने हेतु तैयार हो जाती है।

कश्मीर विलो

कश्मीर विलो

कश्मीर विलो, वो पेड़ है जिससे क्रिकेट के बैट बनाए जाते हैं। भारत में अकेला कश्मीर ही ऐसा राज्य है जहां विलो पेड़ उगाया जाता है क्योंकि कश्मीर विलो को उगने के लिए ठंडे प्रदेशों की जरूरत होती है। विलो पेड़ दो प्रकार के होते हैं – कश्मीर विलो और इंगलिश विलो। इंगलिश विलो को इंग्लैंड में उगाया जाता है। इंग्लैंड के बाद कश्मीर ही ऐसी दूसरी जगह है, जहां विलो का पेड़ उगता है।