रोजमेरी

रोजमेरी

रोजमेरी भारतीय घरों में पाए जाना वाला एक हर्ब है जो ज्यादातर पौधे के तौर पर भी घरों में उगी हुई दिख जाती है। रोजमेरी बैंगनी रंग के फूलों वाला एक सदाबहार पौधा है जिसकी खुशबू अत्यधिक मनमोहक होती है। यही नहीं रोजमेरी में कई अलग-अलग प्रकार के स्वास्थ्यवर्धक लाभ होते हैं, जो इसे एक प्रभावी जड़ी-बूटी बनाते हैं।

जटामांसी

जटामांसी

सेल्फ ग्रूमिंग पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है, ऐसे में आयुर्वेद आपकी मदद करता है। बालों की समस्या हम सबके साथ होती है। पुराने आयुर्वेदिक खजाने में मजबूत और हेल्दी बालों का राज छुपा है। जटामंसी एक ऐसी ही जड़ी-बूटी है जो बालों में नई जान डाल देती है। जटामांसी एक तरह की जड़ी-बूटी है जो जिसका उपयोग बालों की जड़ों के लिए काफी फायदेमंद होता है। जटामांसी को इसके तेल के लिए अधिक उपयोग किया जाता है। जटामांसी की जड़ों से उसका तेल तैयार होता है।

हिना  (मेंहदी)

हिना (मेंहदी)

हिना कहें या कहें मेंहदी, सदियों से हमारे भारतीय घरों का हिस्सा रही है। हिना (मेंहदी) एक पुष्पीय और काँटेदार पौधा है। हिना (मेंहदी) को सबसे अधिक बालों को डाई करने, हाथों पर लगाने के काम में इस्तेमाल किया जाता है। हिना (मेंहदी) का इन सब के अलावा भी इस्तेमाल किया जाता है जैसे- चमड़ा और ऊन को रंगने के काम में भी इस्तेमाल जाता है।

भृंगराज

भृंगराज

भृंगराज एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसे सबसे ज्यादा बालों के फायदों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बालों को लंबा, घना और काला बनाने वाले फायदों के साथ-साथ भृंगराज के दूसरे शारीरिक फायदें भी हैं। भृंगराज पौधे को इसकी जड़, तना, पत्तियों और फूल मतलब की हर भाग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस पौधे में बेलनाकार भूरे रंग का तना होता है और गहरे रंगी की पत्तियां होती जिममें सफेद रंग के सूरजमूखी जैसे छो-छोटे फूल आते हैं।

शिकाकाई

शिकाकाई

शिकाकाई भारत की प्राचीन वनस्पति है, जो हजारों साल से बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। शिकाकाई का वैज्ञानिक नाम एकेशिया कॉनसिना मूल का झाड़ीदार पेड़ है जो, मध्य और दक्षिण भारत के गर्म मैदानों में बहुतायत से पाया जाता है। शिकाकाई को कई नामों से जाना जाता है जैसे – संस्कृत में सप्तला, केश्या, चर्मकषा कहते हैं।