ऑएस्टर मशरूम

ऑएस्टर मशरूम

देश में मशरूम की कई ऐसी प्रजातियां आ गई हैं, जिनकी खेती सालभर की जा सकती है। इससे किसानों में मशरूम खेती को लेकर लोकप्रियता भी बेहद तेजी से बढ़ी है। किसान कम लागत में इसकी खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं। इसकी खेती के लिए किसानों को ज्यादा बड़ी जगह की भी जरूरत नहीं होती है। एक बंद कमरे में भी मशरूम की खेती की जा सकती है।

फुटका

फुटका

जहाँ एक ओर पूरे भारत वर्ष में व्यावसायिक खेती-बाड़ी ज़ोरों शोरों पर है। वहीं झारखण्ड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा जैसे क्षेत्रों में वनोपज का महत्त्व आज भी है। वनोपज के इन्ही घटकों में से मशरुम की फुटका प्रजाति एक दुर्लभ प्रजाति है। फुटका जिसे पुतु भी कहते हैं दिखने में छोटे आकार का होता है। आम मशरुम के विपरीत ये ज़मीन के अंदर पैदा होता है। झारखण्ड के साल के जंगलों में मानसून के मौसम में ये उगता है।

दूधिया मशरूम

दूधिया मशरूम

दूधिया मशरूम या कहें मिल्की व्हाई्ट मशरूम एक स्वादिष्ट और प्रोटीनयुक्त तथा कम कैलोरी प्रदान करने वाला खाद्य पदार्थ है। इसमें पायी जाने वाली प्रोटीन में जरूरी अमीनो अम्ल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कि वृद्धि और विकास के लिए बेहद जरूरी होता है।

गुच्छी मशरुम

गुच्छी मशरुम

मशरूम से बने व्यंजन तो हम सब ने जरूर खाए होंगें लेकिन मशरूम की किस्मों के बारे में जानकारी कम ही होती है। आज बात होगी ‘गुच्छी मशरूम’ के बारे में। गुच्छी मशरूम कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसका औषधीय नाम मार्कुला एस्क्यूपलेटा है। गुच्छी मशरूम को स्पंज मशरूम के नाम से जाना जाता है जो स्वाद में बेजोड़ होता है। भारत और नेपाल में इसे स्थानीय भाषा में छतरी, टटमोर या घुंघरू कहा जाता है। गुच्छी कश्मीर, चंबा, कुल्लू, शिमला, मनाली समेत हिमाचल प्रदेश के कई जिलों के जंगलों में कुदरती पाई जाती है।